शॉर्ट हिल्स के पतझड़ की सुषमा और उसका सौंदर्य वर्णनातीत है। रंगों के इस चमकीले, मन लुभावन मौसम में, जब प्रकृति अपने आकर्षण के शीर्ष पर होती है, हमारी दृष्टि प्रायः उन वृक्षों पर ठहर जाती है जो रंगों के वैभव से आकाश और पृथ्वी दोनों को आलोकित कर देते हैं। पर हर सौंदर्य प्रकाश की तलाश मेंContinue reading “विष वल्लरी- एक कविता”
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विष – वल्लरी
विष कन्याएं विख्यात हैं, इतिहास में भी और हमारी सामाजिक परंपराओं में भी। राजनीति में एक सशक्त विवादास्पद मुहरेकी तरह भी। चाणक्य ने उनके बारे में लिखा और उनका प्रयोग भी किया। दुनिया के स्थापित साम्राज्यों में, चाहे वह रोमकी हों या मिश्र की, या फिर फ़ारस की, विष कन्याओं ने हमेशा एक निर्णायक भूमिका निभाई है. बड़ा ही आकर्षक रहा हैउनका अस्तित्व और उतना ही घातक भी. लेकिन विष वल्लरी? विष वल्लरी अर्थात् विष की लता, बेल. पर विष-वल्लरी? —विष की यह लता, यह बेल, इतिहासकी नहीं, प्रकृति की देन है. शॉर्ट हिल्स, जो इन दिनों मेरा अस्थायी आशियाना है, वहाँ की प्राकृतिक सुंदरता लगभगअतुलनीय है, और उसके बारे में मैंने लिखा भी है. अभी तो पतझड़ के रंग पूरे उतरे नहीं है. इन रंगों की दमक कुछ तो कमहुई है लेकिन उनका वैभव बरकरार है. हाँ, अब तो जमीन भी रंगीन और चमकीली हो गई है, शाख़ों से टूटे और झरे हुए पत्तोंसे. और इन सब के बीच सांस ले रही हैं, पनप रही हैं, ऐसी भी वनस्पतियाँ जिनके बारे में कम ही कहा जाता है और शायदही लिखा जाता है, इनमे से एक है Poison Ivy, एक बेल, एक लता जिसे मैं विष वल्लरी पुकारता हूँ. प्रियदर्शिनी है यह, सुंदर, सुबुक, सुगढ़ देह यष्टि जो विशाल वृक्षों से लिपट कर मनमोहक लगती है। तीन चिकने हरे पत्तोंका त्रिपर्ण समूह एक वलय के रूप में इस कमनीय लता से निकलता है। इसकी भूरी, महीन, रोएँदार जड़ें ओक और मेपलकी छाल को ऐसे थाम लेती हैं मानो उन से आलिंगित हो कर उसकी धड़कने सुन रही हों. इसकी पहचान इसके स्पर्श मैं है. इसे छूते ही पीड़ा से भरी हुई एक जलन पूरे शरीर को झकझोर डालती है. इसके रेशेदार तनों पर लगे महीन, काँच जैसेरोम, छूते ही टूट जाते हैं, और उनकी सुई-सी नोकें त्वचा में घुलते ही गर्मी का छोटा-सा तूफ़ान उठा देती हैं। इनमे ही उनकास्वभाव भी छुपा है, इतिहास भी, और उनकी नियति भी. लेकिन यही छुअन और आक्रमण, यही रोमावली और यहीपर्णावली इसकी ढाल भी है, इसकी भाषा भी. इन्हीं के सहारे यह अपना अस्तित्व स्थापित करती है , उन विशालकाय औरगर्वीले पड़ोसियों के बीच उनके दर्प को चिढ़ाती हुई, जिनकी वजह से कोई न उन्हें देखता है न ही उनकी चाह रखता है. इस पहाड़ी जंगल की चहल-पहल की यह एक धीमी ध्वनि है, एक सौम्य सी सरसराहट है —न दिखने की चाह, न चमकनेकी हड़बड़ी। लेकिन यह हर जगह है—कभी पेड़ों की छाया में, कभी झरनों के किनारे, कभी एक छोटी सी झाड़ी के रूप में. लोग इसे अक्सर भूल जाते हैं पर यह हमें नहीं भूलती. देवदारों की ऊँची शाखाएं जब हवा में लहराती हैं, जब मेपल और ओक अपनी पत्तियों में आग और सोना भर लेते हैं, तबयह, पगडंडी के किनारे चुपचाप खड़ी रहती है —एक चेतावनी, एक सीमा, एक अनकहे नियम की तरह कि हर सुंदर वस्तुस्पर्श के लिए नहीं बनी। क्या यह उन पेड़ों से ईर्ष्या करती है जो पतझड़ में आग की तरह जल उठते हैं? यह जानती है कि उसके रंग भीतर के हैं, बाहर के नहीं, उसकी चमक अंतर्निहित हैं। यह प्रकाश को पाने के लिए शाखाओं पर चढ़ कर आकाश नहीं छूती; यहधरती के पास ही रहती है, क्योंकि वही इसका घर है। और हमारे जैसे लोगों के लिए इसकी चमक नहीं, इसकी चुभनज़्यादा यादगार है—लेकिन जंगल, उसके लिए यह सम्पूर्ण है क्योंकि इसका समर्पण सम्पूर्ण है, और यह समर्पण वन के लिए पर्याप्त है, पतझड़ के इस अद्भुत और असाधारण पर्व की विष-वल्लरी भी भागीदार है —एल अलग शैली में और एक अपने तरीकेसे। पेड़ों की सुनहरी पत्तियाँ जब ज़मीन पर गिरती हैं, तो यह उन्हें थाम लेती है; जब हवा नई ठंडक लाती है, तो यह उसेअपनी सुई-सी रोमावली और सुंदर त्रिपर्णों पर महसूस करती है. इसकी उपस्थिति इस जंगल को संतुलित करती है—थोड़ीसावधानी सिखा कर, थोड़ी विनम्रता का स्मरण कराते हुए. कभी कभी सोचता हूँ यह कमनीय सी बेल देवताओं का बनाया हुआ पहरेदार तो नहीं? इसके बीज पक्षियों का भोजन हैं; इसकी जड़ें मिट्टी को थामे रहती हैं; यह छोटे जीवों के लिए आड़ भी है , और ठंड के दिनों में उनकी शरण भी। फिर यहखलनायिका कैसे हुई? विष बेल अमर बेल नहीं है. यह आश्रिता है परजीविता नहीं और इस आश्रय के लिए सदैव कृतज्ञ रहने वाली. और इसकीसुंदरता भी अनुपम है. हाँ, यह स्पर्श की अनुमति नहीं देती. सौंदर्य दृष्टि का पेय है, स्पर्श का भोजन नहीं है. दिनकर नेउर्वशी में लिखा है, ‘दृष्टि का जो पेय है, वह रक्त का भोजन नहीं है, रूप की आराधना का मार्ग आलिंगन नहीं है ‘ विष वल्लरी, विष कन्याओं की तरह दर्शनीय है, भोग्य नहीं. स्पर्श उसका निषेध है, और दूरी उसका सौदर्य.
Maple: The Flame of Autumn
Not to speak of maples when the world of trees is considered would be a serious omission. But not to speak of them in autumn would be nothing short of a sacrilege. There are trees that announce themselves with grandeur, others that shelter us in silence, and yet a few that live in memory because of a single,Continue reading “Maple: The Flame of Autumn”
पत्तों का सौंदर्य – पर्व
सौंदर्य, क्षय और अमरत्व नवम्बर का महीना लगभग आधा गुज़र चुका है. हवा में ठंडक है, नमी भी. आने वाली बर्फीली सर्दी का पूर्वाभास घर के बाहर कदम रखते ही होने लगता है। आकाश भी कुछ अलग ही तरह के आलोक से आभासित है, कुछ थका हुआ, पर नीरव, बिल्कुल प्रशांत। शॉर्ट हिल्स के वृक्ष अब अपनेContinue reading “पत्तों का सौंदर्य – पर्व”
When the Leaves Become Light
On the Colours of Fall and the Grace of Change “Autumn is a second spring when every leaf is a flower.” — Albert Camus November has come, and with it the final flourish of fall. The trees of Short Hills now stand at the summit of their splendour—each one aflame with hues that no artist couldContinue reading “When the Leaves Become Light”
शॉर्ट हिल्स के परिंदे
नवम्बर का महीना शुरू हो गया है. हवा में आने वाली बर्फीले मौसम का पूर्वानुमान महसूस हो रहा है. पतझड़ अपने चरम पर है. लेकिन सूखे और बदरंग पत्तों वाला नहीं. यह रंगीन पतझड़ है, बेहद रंगीन और खूबसूरत. इतना रंगीन है कि जिसके वर्णन में कल्पना और रचनात्मकता की पूरी परीक्षा हो जाती हैContinue reading “शॉर्ट हिल्स के परिंदे”
Babu Ji’s Legacy – A Testament in Time
There are lives that do not seek recognition, yet they leave behind a quiet radiance that outlives the years. My father — whom we all lovingly call Babuji — was one such man. His life was not marked by possessions or proclamation, but by a luminous simplicity. He lived by values that did not waver with circumstanceContinue reading “Babu Ji’s Legacy – A Testament in Time”
The Magic of Halloween: A Story for My Grandchildren
By Dadu Every year, on the last night of October, something magical happens in many parts of the world — streets fill with laughter, houses glow with pumpkins, and children dress up as witches, fairies, ghosts, and superheroes. It is the night of Halloween! But what is Halloween indeed about? Why do people decorate theirContinue reading “The Magic of Halloween: A Story for My Grandchildren”
हैलोवीन-प्रेत उत्सव या प्रेत पर्व
आस्था, अंधविश्वास, या फिर भय पर विजय का उपक्रम दुनिया में शायद ही कोई ऐसा उत्सव या पर्व हो जब घरों को नरकंकालों, प्रेतों, डायनों, भूतों और हर तरह की डरावनी प्रतीकों से सजाया जाता हो। कौन है ऐसा त्योहार और क्या वजह है त्योहार के इस स्वरूप की? हर वर्ष 31 अक्टूबर की रात को दुनिया के पश्चिमी देशों औरContinue reading “हैलोवीन-प्रेत उत्सव या प्रेत पर्व “
Feathers in the Falling Light — Part II
Birds of Short Hills In the Quiet Days of Late Autumn Morning in late October arrive softly beginning to wear its winter hush. The air thins, the light sharpens, and the woods grow spare. What was once a chorus has become a quiet ensemble — fewer voices, but each one distinct, resonant, enduring. The leaves that remainContinue reading “Feathers in the Falling Light — Part II”