कब लौटोगी , गौरैया?

यह कविता एक मासूम प्रश्न से उपजी। मेरी छह वर्षीया पौत्री  ने मुझसे पूछा, “दादू, गौरैया क्या होती है?” उस क्षण लगा जैसे किसी भूली हुई दुनिया ने धीरे से दस्तक दी हो। गौरैया केवल एक पक्षी नहीं थी; वह हमारे बचपन, हमारे प्रांगणों, और हमारे सह-अस्तित्व की एक जीवंत प्रतीक थी। आज जब वे हमारे आसपास नहीं हैं, तो उनकीContinue reading “कब लौटोगी , गौरैया?”